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Sunday, October 6, 2013

फरार हुए धनकुबेर चिटफंड के



- फुटपाथ पर धंधा करने वाले कुछ ही वर्षों में अरबपति तो बन गए, लेकिन प्रशासन की कार्रवाई होते ही शहर और मुल्क छोड़कर चले गए चिटफंड कारोबारी।

जनता को पैसा दोगुना-तीन गुना करने का लालच देकर अवैध बैकिंग कर रहे चिटफंड कारोबारी ग्वालियर के जिला एवं पुलिस प्रशासन से भागे-भागे फिर रहे हैं। देशभर में चिटफंड का नेटवर्क फैलाकर ग्वालियर से कारोबार चला रहे इन लोगों पर कलेक्टर व एसपी ने न सिर्फ इन कंपनियों के दफ्तर सील कर दिए बल्कि उनकी गिरफ्तारी पर इनाम भी घोषित कर दिया है और गिरफ्तारी के डर से ये कथित अरबपति देश के दूसरों शहरों या दुनिया के दूसरे मुल्कों में अंडरग्राउंड हो गए हैं।

यह कार्रवाई अब एक बड़े पैमाने पर चल रही है। पहले ग्वालियर कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने इन कंपनियों के दफ्तरों पर छापामार कार्रवाई कराकर रिकार्ड जब्त कराया था, लेकिन इस कार्रवाई में निचले स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत से अधिक सफलता हासिल नहीं हो सकी थी और फिर कलेक्टर ने दो माह पहले सभी कंपनियों के दफ्तर सील कराए और समूचा रिकार्ड जब्त कर लिया। ऐसा होने के साथ ही इन चिटफंड कंपनियों में निवेश करने वाले लोग सामने आ गए और धीरे-धीरे प्रशासन के पास हजारों की संख्या में निवेशक पहुंचकर पैसा वापिसी का आवेदन देकर आए।

जब प्रशासन और शासन में बैठे लोगों की आंखे खुली कि अकेले ग्वालियर में चिटफंड का कारोबार हजारों करोड़ों रुपए का है। इसका पता चलते ही कलेक्टर त्रिपाठी ने इन कंपनियों की चल-अचल संपत्ति कुर्क करने के लिए आदेश जारी कर दिए और अब तक अरबों रुपए की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है। जिसकी नीलामी कराकर प्रशासन निवेशकों की राशि मय ब्याज के देने की तैयारी कर रहा है।

इनाम घोषित, सम्मन जारी
रिजर्व बैंक की अनुमति के बिना लोगों से  पैसा जमा करा रही इन चिटफंड कंपनियों के सीएमडी व डायरेक्टरों के खिलाफ पुलिस प्रशासन ने लाखों रुपए का इनाम घोषित कर दिया है और उच्च अधिकारियों ने इनकी गिरफ्तारी के लिए इन धनकुबेरों के घर व दूसरे ठिकानों पर दबिश भी दी, लेकिन कोई नहीं मिला। बताया जा रहा है कि ये चिटफंड कारोबारी देश व देश के बाहर शिफ्ट हो गए हैं। जिनमें से दो बड़े कारोबारी चीन और सिंगापुर में हैं।  इसके अलावा न्यायालय से भी कई चिटफंड कारोबारियों के सम्मन जारी हो चुके हैं, लेकिन कई माह बीत जाने के बाद भी सम्मनों की तामील नहीं हो सकी हैं।

इन कंपनियों पर तालाबंदी
म.प्र. लोक विकास फायनेंस लिमिटेड
समृद्घि जीवन फूड्स इंडिया लि. 
गरिमा रियल इस्टेट एण्ड अलाइड,  
सक्षम डेयरी एण्ड अलाइड लिमिटेड,  
ग्रीन ङ्क्षफगर्स एग्रो लैण्ड मैंटिनेंस एक्स प्रायवेट लिमिटेड,  
रायल सन मार्केङ्क्षटग एण्ड इंश्योरेंस सॢवसेज,  
स्थायी लॉर्क लैण्ड डवलपर्स एण्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर इंडिया लिमिटेड,  
आधुनिक हाउङ्क्षसग डवलपमेंट प्रा.,  
जीवन सुरभि डेयरी एण्ड एलाइड,  
परिवार डेयरी एण्ड अलाइड लि.,  
जेएसव्ही डवलपर्स इंडिया लि.,  
केएमजे लैण्ड डवलपर्स ई. लि. 
इंडिया रियल एस्टेट,  
मधुर रियल एस्टेट एण्ड अलाइड,  
बी.पी.एन. रीयल एस्टेट एण्ड एलाइड,  
प्रवचन डेयरी एण्ड एलाइड लि. 
अनोल सहारा मार्केङ्क्षटग इंडिया लि.,  
के.बी.सी.एल. प्रायवेट लि.,  
जी.एन. लैण्ड डवलपर्स
किम फ्यूचर विजन,  
पी.एसी.एल इंडिया लि.,  
एम के डी लैण्ड डेवलपर्स इंडिया लि.,  
कमाल इंडिया रीयल एस्टेट एण्ड एलाइड लि.,  
सार्थक इंडिया लि. 
आर. बी. एन. लि. ललितपुर कॉलोनी
सांई प्रसाद फूडस इंडिया लि.,  
गालव लीङ्क्षजग एण्ड फायनेंस लि.
जे.सी.ए. मार्केङ्क्षटग लि.,  
चंद्रलोक फायनेंस कंपनी,  
स्टेट सिटीजन साख सहकारी मर्या. 
मधुर टूरिज्म एण्ड मर्केण्टाइल प्रा. लि.,  
मधुर डेयरी एण्ड एलाइड लिमिटेड 
रॉयल सन मार्केङ्क्षटग सॢवसेज प्रा. लि.।

इसलिए हुई कार्रवाई
जिले में अवैध ढंग से आम जनता से धन उगाही का कारोबार किए जाने की शिकायतें मिलने पर कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी ने पुलिस से जाँच कराई थी। पुलिस द्वारा जाँच प्रतिवेदनों में बताया गया था कि उक्त कंपनियां भारतीय रिजर्व बैंक में पंजीयन संबंधी कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकी हैं। विदित हो कि भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 की धारा 45 - आई ए के अनुसार कोई भी नॉन बैंङ्क्षकग कंपनी रिजर्व बैंक में पंजीयन कराये बगैर आम जनता से धन संग्रहण व निक्षेप स्वीकार नहीं कर सकती।

पुलिस ने जाँच प्रतिवेदनों में यह भी स्पष्ट किया था कि उक्त कंपनियों द्वारा कारोबार शुरू करने से पूर्व म.प्र. निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम 2000 के तहत सक्षम अधिकारी को भी सूचित नहीं किया गया है। कंपनियों के पास इतनी चल - अचल संपत्ति व जमा अंश पूंजी होने के कागजात भी नहीं मिले हैं, जिनसे निक्षेपकों से प्राप्त हुये धन को करार या वायदे के मुताबिक समय सीमा में वापस किया जा सके।
साभार
ग्वालियर ब्यूरो
http://www.sabkikhabar.com/archive/index.php?news=23

चिट फण्ड कंपनियों की मीडिया




कांकेर जिले में संचालित सभी कंपनियों के पास अपना मिडिय़ा है।।।
कांकेर जिले में संचालित सभीकंपनियों के पास अपनी मिडीया है और ये अपने काले-पीले कारनामों को  छुपाने के लिए मिडीया का सहारा लेते है.. और फर्जी तरीके से करोबार करते है..?
वर्तमान में कांकेर  जिले में संचालित कं पनियों के पास मिडीया कुछ इस प्रकार है।
सांई प्रसाद फुडस लिमेटेट कंपनी के पास:- हमवतन और न्यूज एक्सप्रेस..
अनमोल फुडस प्राईमेटेट कंपनी के पास:-  अनमोल समाचार..
एच बी एन प्राईवेट लिमेटेट कंपनी के पास:- सीएनईबी न्यूज चैनल..
सन प्लान्ट एग्रो लिमेटेट कंपनी के पास:- सन् टिवी न्यूज चैनल.. 
लोकल  एजेंटों के माध्यम से फर्जी नॉन बैकिंग का करोबार करते है। 
और पुलिस कभी जाग जाऐ तो भोले-भाले ग्रामीण एजेंट इनके  थपेटे में आ जाते है और कंपनी के  संचालक  मिडीया का  सहारा लेक र  बच निक लते है।

अभी हाल में ये सभी कंपनियां कंकेर जिलें में संचालित है और बीना आरबीआई के  प्रमाण पत्र के  नॉन बैकिंग  कांकेर  रोबार क र रही है। और रोजना लाखों क रोड़ो रू पये का लेन-देन क र रही है।

कंाकेर जिलें में चिटफंड कंपनियों द्वारा लगातार लुट- खसौट जारी है। कांकेर  जिले में  चिटफंड कंपनियों के लिए सुरक्षीत चारागाह बन गया है । ऐसी ही अनेक कंपनी बैकिंग का  कारोबार कर रही है,

इन केंपनियो के झांसे में आकर अपनी जमा पुंजी आम लोग लूटा रहे है। न के वलं भोले-भाले ग्रामीण बल्कि  किसान तथा शहर के  क ई व्यवसायी और प्रशासनिक  अधिकारी भी शामिल है।
साभार
शुक्रवार, 8 जून 2012
प्रस्तुतकर्ता tameshwar sinha पर 3:28 am
http://bastarprahri.blogspot.in/2012/06/blog-post_7300.html

सांई प्रसाद और जीएन पर शिकंजा


इंदौर। जिला प्रशासन ने ट्यूलिप ग्लोबल के बाद दो और चिट फंड कंपनी के खिलाफ शिकंजा कसा है। तय राशि जमा करने पर छह साल में दोगुना से ज्यादा पैसा वापस देने का झांसा देकर लोगों को ठगने वाली सांई प्रसाद प्रॉपर्टी लिमिटेड कंपनी व जीएन ग्रुप ऑफ कम्पनी के खिलाफ कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं। सांई प्रसाद के खिलाफ प्रदेशभर में कई जगहों पर जांच चल रही है।

सांई प्रसाद को लेकर यशवंत रोड निवासी नितिन मिश्रा ने कलेक्टर आकाश त्रिपाठी को शिकायत की है। शपथ पत्र पर शिकायत में मिश्रा ने कंपनी पर झूठा वादा कर प्रलोभन राशि नहीं देने का आरोप लगाया है। मिश्रा के अनुसार, 27 जनवरी 2011 को उन्होंने कंपनी के उज्ौन ऑफिस से फिक्स्ड डिपॉजिट पॉलिसी खरीदी थी।

कंपनी ने एकमुश्त 4000 रूपए भरवाकर छह साल में 8640 देने का वादा किया था। यह राशि हर साल 1440 रूपए देना तय हुआ। कंपनी ने छह चेक भी तत्काल दे दिए। एक साल होने पर जब कंपनी के इंदौर ऑफिस में संपर्क किया तो चेक का भुगतान करने से इनकार कर दिया। कंपनी से जब सरकार की अनुमति संबंधी दस्तावेज मांगे तो अफसरों ने इनकार कर दिया। तब से मिश्रा अपने पैसों के लिए भटक रहे हैं, लेकिन कंपनी प्रोत्साहन राशि नहीं दे रही है।
साभार

http://www.garimatvnews.com/index.php?option=com_content&view=article&id=7276:2012-12-04-01-00-44&catid=36:2011-09-25-09-45-08&Itemid=55

फर्जी चिटफंड कपनियों की मीडिया


कांकेर जिले में संचालित सभी कपनियों के पास अपनी मिडिय़ा है।

सांई प्रसाद फुडस लिमेटेट कपनी के पास: हमवतन और न्यूज एक्सप्रेस..
अनमोल फुडस प्राईवेट लिमेटेट कपनी के पास: अनमोल समाचार..
एचबीएन प्राईवेट लिमेटेट कपनी के पास: सीएनईबी न्यूज चैनल..
सन प्लान्ट एग्रो लिमेटेट कपनी के पास: सन् टिवी न्यूज चैनल..

लोकल एजेंटों के माध्यम से फर्जी नॉन बेकिंग का करोबार कर रहा अनमोल फुडस प्राईवेट लिमेटेट...

अभी हाल में ये सभी कपनियां कारोबार कांकेर जिलें में संचालित है और बीना आरबीआई के प्रमाण पत्र के नॉन बैकिंग करोबार कर रही है। और रोजना लाखों करोड़ो रूपये का लेन-देन कर रही है।
और ये भोले-भाले आम लागों को लूटने का काम कांकेर जिला पोलिस प्रशासन के संरक्षण में चल रहा है, कांकेर पुलिस प्रशासन मात्र जांच पर जांच कर रही है।

जिलें में चिटफंड कपनियों द्वारा लगातार लुट- खसौट जारी है। कांकेर जिले में चिटफंड कपनियों के लिए सुरक्षीत चारागाह बन गया है । ऐसी ही एक कपनी अनमोल प्राईवेट फुडस लिमेटेट हर्बल और दुग्ध उत्पाद बता कर बैकिंग का करोबार कर रही है।
साभार

Written by Anil Agrawal

http://www.vafadarsaathi.com/index.php/police/101-2012-05-14-13-54-13#sthash.3zHu6nQ6.dpuf

Saturday, October 5, 2013

सांई प्रसाद ग्रुप ऑफ कंपनी पर पड़ा छापा - जमीन दिलाने का हो रहा था अवैध कारोबार


जगदलपुर !  शहर के धरमपुरा स्थित सांई गु्रप आफ कंपनी के कार्यलय में 3 सितम्बर को जिला प्रशासन द्वारा छापा मारा गया। इस कंपनी पर जमीन दिलाने के नाम पर फर्जी तरीके से ग्राहकों से लाखों रूपये बंटोरने का आरोप है। जिला प्रशासन द्वारा कंपनी के कागजात एवं अन्य दस्तावेजों की जांच में उक्तासय का खुलासा हुआ है।

महाराष्ट्रीय के पुणे की कंपनी सांई गु्रप ऑफ कंपनी की यहां गत मार्च महीने में धरमपुरा में कार्यालय खोला गया। बताया गया कि कंपनी के स्थानीय प्रबंधक द्वारा उक्त भवन के द्वितीय तल के हॉल को प्रति माह 20 हजार रूपये के किराये पर लिया गया है। कंपनी का मुख्यालय राजधानी रायपुर में स्थित है, जिसके मुख्य प्रबंधक संतोष श्रीवास नामक व्यक्ति हैं। दरअसल कंपनी 12,000 रूपये की सहभागिता के लिए 500 वर्ग फुट भूमि अनुपात से अपने ग्राहकों से बॉड पेपर पर लेन-देन कर उक्त अवैध कारोबार को अंजाम देने में पिछले 7 महीने में कामयाब हुआ है। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार अपर कलेक्टर नीलकंठ टीकाम तथा तसहीलदार ओपी धाभाई द्वारा शक के आधार पर नगरनार संयंत्र क्षेत्र के प्रभावित मुआवजा प्राप्त खातेदारों के द्वारा जमीन लेने के लिए जमा कराये गये लाखों रूपये के बॉड पेपर कंपनी के स्थानीय प्रबंधन से मांगा गया, किन्तु उसने इन प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष उन दस्तावेजों को प्रस्तुत नहीं कर पाये। उल्लेखनीय है कि उक्त कंपनी के द्वारा सांई प्रसाद फूड लिमिटेड तथा सांई प्रसाद प्रॉपीर्टीज लिमिटेड से संबंधित कार्य किये जाते हैं। 

कंपनी ने अब तक अपना जाल दंतेवाड़ा से लेकर उड़ीसा के मलकानगिरी तक फैला लिया है। कंपनी द्वारा जो बॉड ग्राहकों से भरवाया जाता है उसमें उनके द्वारा जमा रकम के बदले कितने साल बाद जमीन दी जावेगी इसका कहीं भी जिक्र नहीं है।

जांच के दौरान तहसीलदार श्री धाभाई ने कहा कि कंपनी ने स्थानीय युवकों को 20 प्रतिशत कमिशन दिलाने का लालच देकर इतनी बड़ी संख्या में ग्राहकों को फंसाने में सफलता पायी है।
जाहिर है कि एक ऐसे ही मामले में कल देर शाम गुरूवार को  ग्वालियर की कंपनी गरिमा रियल इस्टेट जिसका रायपुर में ब्रंाच तथा जगदलपुर में रीजनल ऑफिस है उसने एक पखवाड़े के अंदर प्लांट प्रभावितों के 42 लाख रूपए हड़प लिए हैं। 

शिकायत के आधार पर जिला प्रशासन ने गीदम रोड पर स्थित गरिमा ग्रुप ऑप कंपनी के दफ्तर को जिला प्रशासन ने साल कर दिया है। नगरनार स्टील प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण के बाद प्रभावितों को शासन ने लाखों रूपए का मुआवजा दिया था जिसे कंपनी रकम को दुगुना करने का लालच देकर ग्रामीणों को फांस रही थी।
साभार
(09:00:11 PM) 03, Sep, 2010, Friday
http://www.deshbandhu.co.in/newsdetail/51831/2/1

सांई प्रसाद समूह के खिलाफ वृद्ध महिला घरने पर


साभार
नई दुनिया, राष्ट्रीय संस्करण, 04 अक्तूबर 2013

Friday, July 19, 2013

साई प्रसाद फूड्स और उसके डायरे€टरों- बालासाहब के. भापकार वंदना बी. भापकार और शंशाक बी. भापकार से आर्थिक व्यवहार न करें - सेबी


दिल्ली. उ‘चतम ‹यायालय ने शारदा चिटफंड घोटाले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर दायर याचिका पर केंद्र और बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया है. प्रधान ‹यायाधीश ‹यायमूर्ति अल्तमस कबीर की पीठ ने देश में चिटफंड योजनाओं के नियमन के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी को अधिक ताकत देने के लिए दायर याचिकाओं को लेकर भी दूसरी रा’य सरकारों और केंद्र को नोटिस दिया.

देश की सबसे बड़ी अदालत ने प्रीतम कुमार सिंह रे तथा सुब्रत चटर्जी की ओर से दायर 2 याचिकाओं पर आदेश पारित किया. इन दोनों याचिकाओं में देश में चिटफंड के कारोबार पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने और आगे पैसे को एक˜ा करने पर तˆकाल रोक लगाने की मांग की गई थी.

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उ‹हें पुलिस अधिकारियों में कोई विश्ïवास नहीं है. भारी मुनाफे का लालच देकर निवेशकों को फंसाने वाली योजनाओं पर कार्रवाई के तहत सेबी ने 2 कंपनियों और उसके डायरे€टरों के कामकाज पर रोक लगा दी है.

इनके फंड ट्रांसफर प्रापर्टी के ट्रांसफर और बिक्री पर भी रोक लगा दी गई है. सेबी ने पाया कि साई प्रसाद प्रापर्टीज और साई प्रसाद फूड्स मŠयप्रदेश में जमीन खरीद-बिक्री के नाम पर अवैध तरीके से सामूहिक निवेश योजनाएं चला रही थी.

कंपनी लोगों को 15 से 20 फीसदी सालाना रिटर्न का वादा कर उनसे निवेश के पैसे ले रही थी. अंतरिम कदम उठाने की तˆकाल जरूरत है ताकि किसी निवेशक के साथ धोखाधड़ी न हो. कंपनियों को सेबी के साथ रजिस्ट्रेशन कराए बिना सामूहिक निवेश योजना से संबद्ध योजनाएं नहीं चलाना चाहिए.
साभार:
http://www.navabharat.biz/index.php/notice93

सांई ग्रुप के सुप्रीमो बाला साहेब के खिलाफ कानपुर में FIR दर्ज

साईं ग्रुप के गोरखधंधे के खुलासे की कड़ी में साईं प्रकाश के सीएमडी पुष्पेन्द्र बघेल के बाद अब साईं प्रसाद ग्रुप ऑफ कंपनीज के सीएमडी और सुप्रीमो बाला साहेब भापकर सहित  एक दर्जन लोगों के खिलाफ कानपुर के नौबस्ता थाने में एक FIR दर्ज कराई गई है।

कानपुर के नौबस्ता गल्ला मंडी निवासी बबलू कश्यप ने शनिवार थाने में साई प्रसाद ग्रुप के सीएमडी बाला साहेब भापकर,सीईओ एसएल श्रीवास्तव, वाइस प्रेसीडेंट संजय राय, जोनल अधिकारी शीशपाल यादव, एसआरएम देवदत्त चौधरी, कंट्री टीम कंट्रोलर डॉ.अशोक, डॉ. एके दीक्षित, तरुण यादव, जीपी यादव, ब्रांच मैनेजर निकेत जैन व एसआरएम मुंकद के खिलाफ धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कराया है।
बबलू का आरोप है कि कंट्री टीम कंट्रोलर डॉ. अशोक ने 17700 रुपया साईं प्रसाद प्रापर्टीज में लगवाया था। जिसके लिए कहा था कि यह पैसा तीन साल में दो गुना, पांच साल में तीन गुना व सात साल में पांच गुना हो जायेगा। साथ ही जमीन का एग्रीमेंट भी होगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। नौबस्ता पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने की पुष्टि की है।

साथ ही पुलिस ने साईं प्रकाश ग्रुप से सीएमडी पुष्पेंद्र बघेल व धर्मवीर से रिमांड के दौरान पूछतांछ में लगे सबूतों के आधार पर पड़ताल तेज कर दी है। इसी के चलते साईं ग्रुप से जुड़े दफ्तरों में स्थानीय पुलिस के माध्यम से प्रपत्रों को कब्जे में लेकर जांच पड़ताल शुरू करा दी गई है। वहीं साईं ग्रुप से जुड़े अधिकारियों व अधिवक्ताओं ने भी पैरवी तेज कर दी है।

साभार:
Thursday, March 7, 2013
Posted by Rajawat at 7:46 AM
http://mlmnewspapers.blogspot.in/2013/03/fir-fir.html

नॉन बैंकिंग कंपनी का दफ्तर सील

- जांच अधिकारी को कोई प्रमाण नहीं दिखा सके शाखा प्रबंधक
- ऑडिट रिपोर्ट में भी मिली गड़बड़ी

हमारे प्रतिनिधि, बांका : जिला में नॉनबैंकिंग कंपनियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई जारी है। पूरे जिला के विभिन्न बाजारों में अब तक दो दर्जन से अधिक शाखाएं प्रशासन सील कर चुकी है।

इसी कड़ी में वरीय उप समाहत्र्ता सह बैंकिंग पदाधिकारी प्रभात कुमार के नेतृत्व में प्रशासन की एक टीम ने मंगलवार को बांका शहर के सांई प्रसाद नॉन बैंकिंग कार्यालय पर छापा मारा। कार्यालय के आवश्यक कागजातों की जांच के बाद अधिकारियों ने उसे सील कर दिया।

जांच अधिकारी प्रभात कुमार ने बताया कि छापा के वक्त शाखा प्रबंधक नीरज कुमार सिंहा और कर्मी भी वहां मौजूद थे। बैंक का ऑडिट रिपोर्ट गलत मिला। उन्होंने बताया कि शाखा के पास पब्लिक डिपोजिट के लिए आरबीआई एक्ट का पंजीयन नहीं है। साथ ही प्रोडक्ट बेच कर सामूहिक निवेश का कोई प्रमाण पत्र भी उनके पास नहीं मिला।

जांच अधिकारी ने बताया कि शाखा के अंदर के कागजातों की जब्ती सूची बनाकर शाखा प्रबंधक को सुपूर्द कर दिया गया है। कई आवश्यक कागजात जांच के लिए लाये गये हैं। इसके बाद कार्यालय को सील कर दिया गया है।

वरीय उप समाहत्र्ता ने श्री कुमार ने कहा कि गरीब उपभोक्ता ऐसे बैंकों से बचें। मान्यता प्राप्त बैंक में ही खाता का संचालन का राशि की जमा निकासी करें। उन्होंने कहा कि ऐसे बैंकों के खिलाफ प्रशासनिक मुहिम लगातार जारी रहेगी।

साभार:
Updated on: Wed, 08 May 2013 01:03 AM (IST)
http://www.jagran.com/bihar/banka-10370035.html

हाईकोर्ट ने जारी की 33 MP चिटफंड कंपनियों की लिस्ट, दिए CBI जाँच के आदेश

उत्तर प्रदेश की एकमात्र कंपनी कल्पतरु की ही तरह मध्य प्रदेश में ऐसी 33 कम्पनियां है जिन पर हाईकोर्ट ने तो चाबुक चलाया लेकिन उपरोक्त सभी विभाग और राज्य सरकार उनके जख्मों पर मलहम लगाकर उन्हें काम की पूरी छूट दे रही है।

इन कंपनियों के लिस्ट पर नज़र डालते ही साफ़ हो जाता है कि ये कंपनिया अपने मूल धंधे से अलग हटकर सरकार की नाक के नीचे ही लोगो की गाढ़ी कमाई को कैसे हड़प रही है। कोई कंपनी डेवलपिंग के नाम पर तो कोई मार्केटिंग के नाम पर अपना धंधा चला रही है।

हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने जिन कंपनियों के सीबीआई जांच के आदेश दिए उनके नाम निम्न है।
1- मध्य प्रदेश लोक विकास फाइनेंस लिमिटेड
2 - समृद्धा जीवन फूड्स इंडिया लिमिटेड
3 - गरिमा रियल एस्टेट एंड एलायड
4 - सक्षम डेयरी इंडिया लिमिटेड
5 - ग्रीन फिंगर्स एग्रो लैंड मेंटेनेन्स प्राइवेट लिमिटेड
6 - रायल सन मार्केटिंग एंड इंश्योरेंस सर्विस
7 - स्काई लार्क लैंड डेवलपर्स एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर इंडिया लिमिटेड
8 - आधुनिक हाउसिंग डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड
9 - जीवन सुरभि डेयरी एंड एलायड
10-परिवार डेयरी एंड एलायड लिमिटेड
11- JSV डेवलपर्स इंडिया लिमिटेड
12- KMJ लैंड डेवलपर्स इंडिया लिमिटेड
13- सन इंडिया रीड एस्टेट
14- मधुर रियल एस्टेट एंड एलायड
15- BPN रियल एस्टेट एंड एलायड
16- KBCL प्राइवेट लिमिटेड
17- G N लैंड डेवलपर्स
18- किम फ़यूचर विजन इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स लिमिटेड
19- P A C L इंडिया लिमिटेड
20- M K D लैंड डेवलपर्स इंडिया लिमिटेड
21- कमल इंडिया रीड एस्टेट एंड एलायड लिमिटेड
22- सार्थक इंडिया लिमिटेड
23- R B N रियल एस्टेट इन्फ्रास्ट्रक्चर इंडिया लिमिटेड
24- साईं प्रसाद फ़ूड इंडिया लिमिटेड, साई प्रसाद प्रापर्टीज
25- गालव लीजिंग एंड फाइनेंस लिमिटेड
26- G C A मार्केटिंग लिमिटेड
27- चन्द्रलोक फिनवेस्ट प्राइवेट लिमिटेड
28- स्टेट सिटिज़न सख सहकारी मार्या
29- मधुर टूरिस्म एंड मर्केंटाइल प्राइवेट लिमिटेड
30- मधुर डेयरी एंड एलायड लिमिटेड
31- रायल सन मार्केटिंग

कभी छोटे मोटे धंधे करके अपनी जीविका चलाने वाले इन कंपनियों के मालिक आज हज़ारों करोडो में खेल रहे है। ऐसी ही एक कंपनी है सक्षम डेयरी इंडिया लिमिटेड और जीवन सुरभि डेयरी एंड एलायड जिनका पहले दूध का व्यवसाय था आज इन कंपनियों ने चिट फंड के बिजनेस में मध्यप्रदेश और आस पास के राज्यों में अपना ऐसा मकड़जाल फैला रखा है जिसमें फंसकर आम आदमी धीरे धीरे अपने मेहनत की कमाई को लुटा रहा है। मध्य प्रदेश में कुकुरमुत्ते की तरह उगी इन कंपनियों ने जहा आम आदमी को धता बताया वही सरकार को भी अपनी पाकेट में रखा।

सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा इनकी जाँच कर रही है लेकिन कैसे कर रही है इसकी जांच कोई नहीं कर रहा ।

ग्वालियर की हाईकोर्ट बेंच जब भी फटकार लगाती है तब जांच के नाम पर कंपनियों के खाते सील कर दिए जाते है, कंपनिया कुछ दिनों के लिए काम बंद करती है फिर पुराने ढर्रे पर वापस आ जाती है। ऐसी ही एक कंपनी है उत्तर प्रदेश से स्थापित की गई कल्पतरु जो मथुरा शहर से संचालित होती है और इसका नाम है केबीसीएल इंडिया लिमिटेड, 'कल्पतरु'|

वर्ष 2002 में रजिस्ट्रार आफ कंपनीज, उत्तर प्रदेश के कानपुर कार्यालय से एक पब्लिक लिमिटेड फार्म का सर्टिफिकेट और आईएसओ नंबर हासिल करे वाली कल्पतरु कंपनी अपने निवेशकों को उनका पैसा दोगुने से साढ़े तीन गुना करने के सपने दिखाती है| इसके अलावा कल्पतरु कंपनी ने देश के 14 राज्यों में सौ से अधिक कार्यालय भी खोल रखे है|

साभार:
Monday, 13 May 2013
Read More on: http://www.mlmharkhabar.com/2013/05/33-mp-cbi.html
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