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Wednesday, August 1, 2012

भारतीय सेना में 360 करोड़ का राशन घोटाला

नई दिल्ली।। अनुशासित और ईमानदार मानी जाने वाली सेना में घोटाले के नए-नए कारनामे सामने आ रहे हैं। सेना प्रमुख को घूस की पेशकश के बाद अब सेना में राशन घोटाला का पर्दाफाश हुआ है। यह घोटाला रक्षा मंत्रालय के आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया है।

सेना की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 10 सालों में सेना में फौजियों को खाना खिलाने के नाम पर करीब 360 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय सेना में 12 लाख जवान हैं, लेकिन सेना में पिछले 10 सालों में करीब 14 लाख फौजियों को खाना खिलाने के लिए पैसा खर्च किया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 सालों में करीब 4 लाख फौजियों ने खाने के पैसे लिए, वहीं करीब 10 लाख सैनिकों को खाना खिलाने पर पैसा खर्च किया गया। अहम सवाल यह है कि जहां सैनिकों की कुल संख्या ही 10 लाख है वहां पर 14 लाख सैनिकों को खाना कैसे खिलाया गया?

रिपोर्ट में सेना में हुए इस घोटाले का पर्दाफाश करते हुए इसकी जांच की सिफारिश की गई है।

साभार
नवभारत टाइम्स, नवभारतटाइम्स.कॉम, 1 Apr 2012
http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/12489881.cms

अनाज घोटाले में 5000 FIR की जरूरत

घोटालों के इस मौसम में इस देश का सबसे बड़ा घोटाला सामने आया है। अनाज घोटाला 35 हजार करोड़ से 2 लाख करोड़ के बीच होने की आशंका जताई जा रही है। यह घोटाला पांच देशों नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान, साउथ अफ्रीका और भूटान तक फैला हुआ है। इस घोटाले में उत्तर प्रदेश के 71 जिलों में से 34 जिले शामिल हैं। इस घोटाले में साढ़े 400 उच्च सरकारी अधिकारी, मंझले-छोटे सरकारी अधिकारी और 10 हजार प्राइवेट फर्म या लोग शामिल हैं।

इस घोटाले में अगर सारी एफआईआर (FIR) करवाई जाएं तो उनकी गिनती 5000 तक पहुंचेगी। अगर यह आपको सच नहीं लग रहा है तो इसके लिए उत्तर प्रदेश के एक जिले का ही उदाहरण देना काफी होगा। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के आदेश पर जब यूपी पुलिस के फूड सेल से मामला एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) को सौंपा गया तब तक 6000 से ज्यादा लोगों के खिलाफ 63 एफआईआर दर्ज की जा चुकी थीं। इसमें 21 लोग उपजिलाधिकारी और जिला आपूर्ति अधिकारी जैसे पदों पर थे।

महाघोटाले में कब क्या हुआ
नवंबर 2004- मुख्य सचिव (फूड एंड सिविल सप्लाई) प्रशांत चतुर्वेदी ने रेलवे से बांग्लादेश और बाकी देशों को भेजने के लिए अनाज की लोडिंग के बारे में जानकारी मांगी।

दिसंबर 2004- रेलवे ने उन जिलों और स्टेशनों की एक सूची दी जहां से बांग्लादेश को अनाज भेजा जा रहा था।

2005- लखीमपुर खीरी के जिला अधिकारी एस.पी.एस. सोलंकी समेत उन अधिकारियों के नाम दिए गए जिनके खिलाफ अनाज घोटाले में शामिल होने की वजह से विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी।

2006- मुलायम सिंह यादव की सरकार ने मामले को आर्थिक अपराध शाखा को सौंपा। आर्थिक अपराध शाखा ने अकेले बलिया जिले में 50 से ज्यादा मामले दर्ज किए।

जून 2007- मायावती ने मामले को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एस.आई.टी.) को सौंप दिया।

सितंबर 2007- एस.आई.टी. की रिपोर्ट से उत्तर प्रदेश सरकार को भारी नुकसान होने का पता चला।

दिसंबर 2007- मायावती सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की।

2008- सीबीआई ने केवल तीन जिलों के कुछ मामलों को अपने हाथ में लिया। विश्वनाथ चतुर्वेदी ने तेज जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने केस को इलाहाबाद हाई कोर्ट को भेजा।

3 दिसंबर 2010- इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने सीबीआई को पूरे घोटाले की जांच करने को कहा।

किसमें कितना घोटाला
बोफोर्स घोटाला- 64 करोड़ रुपए
यूरिया घोटाला- 133 करोड़ रुपए
चारा घोटाला- 950 करोड़ रुपए
शेयर बाजार घोटाला- 4000 करोड़ रुपए
सत्यम घोटाला- 7000 करोड़ रुपए
स्टैंप पेपर घोटाला- 43 हजार करोड़ रुपए
कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला- 70 हजार करोड़ रुपए
2जी स्पेक्ट्रम घोटाला- 1 लाख 67 लाख करोड़ रुपए
अनाज घोटाला- 2 लाख करोड़ रुपए (अनुमानित)

साभार
नवभारत टाइम्स, टाइम्स न्यूज नेटवर्क, परवेज इकबाल सिद्दीकी, 9 Dec 2010
http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/7069382.cms

'यूपी का अनाज घोटाला 2जी से भी बड़ा'

उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के शासनकाल में अनाज घोटाले की बात उजागर होने के बाद इस मसले पर राजनीतिक लड़ाई शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने इस घोटाले की जिम्मेदारी पूरी तरह तत्कालीन सीएम मुलायम पर डाल दी है। हमारे सहयोगी चैनल टाइम्स नाउ के मुताबिक , देश के किसी गरीब राज्य से यह अब तक का सबसे बड़ा घोटाला माना जा रहा है। लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के इस घोटाले में गरीबों के लिए तय अनाज को जानबूझकर और एक प्रक्रिया के तहत खुले बाजार में देश और विदेश में बेचा गया। यह घोटाला 7 साल तक चला और इसमें 5,000 एफआईआर भी दर्ज हुईं।

याचिकाकर्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी ने कहा कि लंबे समय से इस मामले को दबाने की कोशिश हो रही थी। उनके मुताबिक, 'यह घोटाला 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन और कॉमनवेल्थ घोटाले से भी बड़ा है। इस घोटाले पर केंद्र का रिएक्शन इलाहाबाद हाई कोर्ट की ओर से इस मसले पर सख्ती दिखाने के बाद आया है।'

कोर्ट ने शुक्रवार को यूपी की जांच एजेंसियों को आदेश दिया था कि वे इस केस को सीबीआई के सुपुर्द करें और जांच का काम 6 महीने के भीतर पूरा किया जाए। माना जाता है कि यह घोटाला मुलायम के कार्यकाल में 2003 और 2007 के बीच अंजाम दिया गया।

कोर्ट की लखनऊ बेंच ने शुक्रवार को अपने आदेश में उच्च अधिकारियों को गरीबों से उनका निवाला छीनने के लिए सख्त टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा कि बेशक पहली नजर में साफ दिखता है कि गरीबों के लिए तय अनाज की स्मगलिंग की गई। बड़ी अथॉरिटी की मदद के बिना ऐसा करना मुमकिन नहीं था। अनाज को जिस तरह देश के दूरदराज इलाकों में मालगाड़ियों से पहुंचाया गया , उससे भी यह बात साबित होती है। कोर्ट ने कहा कि जब करप्शन देश के विकास पर बड़ी चोट कर रहा हो, तब जुडिशरी मूक दर्शक नहीं बन सकती।

साभार
नवभारत टाइम्स, 07 Dec 2010